नेपाल में ट्रेड यूनियन खत्म करने के फैसले पर बवाल, कर्मचारी संगठनों की अदालत जाने की तैयारी

नेपाल सरकार के एक बड़े फैसले को लेकर देश में विवाद खड़ा हो गया है। राजधानी Kathmandu में सिविल सेवा कर्मचारी ट्रेड यूनियन को समाप्त करने के निर्णय के खिलाफ कई कर्मचारी संगठन खुलकर सामने आ गए हैं।
सरकार के इस फैसले के विरोध में छह प्रमुख कर्मचारी संगठनों—Nepal Civil Service Employees Organization, Nepal Civil Service Union, Nepal National Civil Service Organization, United Government Employees Organization, Nepal Madhesi Civil Service Forum और Independent National Service Employees Organization ने इसे मनमाना और अस्वीकार्य बताया है।
कर्मचारी संगठनों ने कहा है कि यह निर्णय संविधान और श्रमिक अधिकारों का उल्लंघन है। उनका तर्क है कि संविधान की धारा 17 और 34 सहित अंतरराष्ट्रीय श्रम कानूनों के तहत कर्मचारियों को संगठित होने का अधिकार प्राप्त है, जिसे किसी भी स्थिति में छीना नहीं जा सकता।
इस विवाद के बीच सरकार द्वारा जारी अध्यादेश, जिसे राष्ट्रपति Ram Chandra Paudel ने मंजूरी दी थी, के बाद दशकों पुरानी ट्रेड यूनियन व्यवस्था समाप्त हो गई है।
कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके अधिकार बहाल नहीं किए गए तो वे इस फैसले को अदालत में चुनौती देंगे और कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम को नेपाल में श्रम अधिकारों और सरकारी नीतियों के बीच बढ़ते टकराव के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक तनाव बढ़ सकता है।






