नेपाल सरकार द्वारा अध्यादेश लाए जाने का सत्तारूढ़ दल के सांसदों द्वारा विरोध

नेपाल में बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा दो अध्यादेश लाए जाने को लेकर सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

सरकार ने संसद सत्र स्थगित कर संवैधानिक परिषद और सहकारी संबंधी दो अध्यादेश जारी करने के लिए राष्ट्रपति के समक्ष सिफारिश की है। इस फैसले के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

आरएसपी सांसद गणेश कार्की ने सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि संसद सत्र रोककर अध्यादेश लाना “बहादुरी” नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि भले ही यह संवैधानिक अधिकार हो, लेकिन इस बार संविधान की भावना का पालन नहीं किया गया।

वहीं इसी पार्टी के एक अन्य सांसद राजीव खत्री ने सरकार का बचाव किया और अध्यादेश को उचित ठहराया। उन्होंने कहा कि कानून बनाने की प्रक्रिया लंबी होती है और कई चरणों से गुजरती है, इसलिए परिस्थितियों के अनुसार अध्यादेश लाना आवश्यक हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि असली सवाल यह है कि अध्यादेश का उद्देश्य क्या है, न कि सिर्फ उसकी प्रक्रिया पर सवाल उठाना।

पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेद को देखते हुए आरएसपी अध्यक्ष रवि लामिछाने ने सांसदों की बैठक बुलाई है। सभी सांसदों को संसदीय दल कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

इस घटनाक्रम ने नेपाल की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है और सरकार की रणनीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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