डिजिटल इंडिया में ‘मूल हिन्दी’ पर विवाद, सरकारी वेबसाइटों से हटाने पर गृह मंत्रालय से शिकायत

देश में डिजिटल गवर्नेंस के तेजी से विस्तार के बीच सरकारी वेबसाइटों से मूल हिन्दी हटाए जाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर अब गृह मंत्रालय और संसदीय राजभाषा समिति को औपचारिक शिकायत पत्र भेजा गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि हिन्दी को उसकी मूल स्थिति से हटाकर केवल मशीन ट्रांसलेशन पर आधारित कर दिया गया है।
लखनऊ से भेजे गए इस पत्र में दावा किया गया है कि अधिकांश सरकारी वेबसाइटों पर अब अंग्रेजी को मूल भाषा के रूप में रखा जा रहा है, जबकि हिन्दी को केवल भाषिणी और अनुवादिनी जैसे टूल्स के जरिए अनुवादित रूप में दिखाया जा रहा है। इसे राजभाषा की संवैधानिक स्थिति के खिलाफ बताया गया है और अनुच्छेद 343 के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि 2008 के सरकारी आदेश के अनुसार सभी वेबसाइटों को द्विभाषी होना चाहिए, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा है। शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि मशीन आधारित अनुवाद की गुणवत्ता कमजोर होने के कारण सरकारी सूचनाओं की स्पष्टता प्रभावित हो रही है।
विवाद को और गंभीर बनाते हुए पत्र में कहा गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिन्दी का वास्तविक उपयोग लगातार घट रहा है, जबकि राजभाषा विभाग और अनुवाद तंत्र पर भारी खर्च किया जा रहा है। इसमें यह सवाल भी उठाया गया है कि जब सरकारी विभागों में अनुवादक और राजभाषा अधिकारी मौजूद हैं तो पूरी तरह मशीन ट्रांसलेशन पर निर्भरता क्यों बढ़ाई जा रही है।
अब यह मुद्दा केवल तकनीकी नहीं बल्कि भाषाई और संवैधानिक बहस का रूप लेता दिख रहा है। आने वाले समय में इस पर सरकार की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि डिजिटल इंडिया में हिन्दी की भूमिका मूल रूप में बहाल होगी या केवल एक अनुवाद विकल्प बनकर रह जाएगी।






