अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल-लेबनान की ऐतिहासिक बैठक, 30 साल बाद हुआ सीधा संवाद

Israel Lebanon Talks के तहत अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच एक ऐतिहासिक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। करीब 30 वर्षों बाद दोनों देशों के बीच इस स्तर पर सीधा संवाद हुआ है, जिसे US Mediation Middle East के दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस बैठक की मेजबानी करते हुए इसे एक “ऐतिहासिक अवसर” बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल तत्काल युद्धविराम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय Hezbollah Conflict के प्रभाव को स्थायी रूप से खत्म करना है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी और इजरायल व लेबनान के राजदूत शामिल हुए। 1993 के बाद यह पहली बड़ी उच्च-स्तरीय बातचीत रही, जिसमें सभी पक्षों ने तय समय और स्थान पर सीधी वार्ता आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
अमेरिका ने लेबनान की उस नीति का समर्थन किया, जिसमें देश के भीतर सैन्य नियंत्रण केवल सरकार के पास रखने और ईरान के प्रभाव को कम करने की बात कही गई है। वहीं, इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार को भी दोहराया गया, खासकर हिजबुल्लाह के हमलों के संदर्भ में।
इजरायल ने सभी गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों को निःशस्त्र करने और आतंक से जुड़े ढांचे को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि लेबनान ने नवंबर 2024 के युद्धविराम समझौते को पूरी तरह लागू करने और अपनी संप्रभुता बनाए रखने की बात दोहराई।
Middle East Peace Talks के बीच यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दक्षिणी लेबनान में संघर्ष जारी है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बना हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन में हुई यह बैठक दो घंटे से अधिक चली और इसे एक कार्य समूह के रूप में आयोजित किया गया।
गौरतलब है कि Marco Rubio Statement के अनुसार, यह वार्ता भविष्य में स्थायी और टिकाऊ शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है, जिससे इजरायल और लेबनान दोनों देशों के नागरिकों को सुरक्षित और बेहतर जीवन मिल सके।






