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जमालपुर लोको शेड में ‘स्क्रैप टू आर्ट’ से बनी स्वदेशी कंप्रेसर इकाई, आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा

Jamalpur Loco Shed में भारतीय रेल की एक अनोखी पहल सामने आई है, जहां Scrap to Art Initiative के तहत पुराने और कंडम घोषित इंजनों के पुर्जों का पुनर्चक्रण कर एक Indigenous Compressor Unit का सफल निर्माण किया गया है। यह पहल न केवल नवाचार का उदाहरण है, बल्कि संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

पूर्व रेलवे के मालदा मंडल के अंतर्गत विकसित इस परियोजना को मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन और वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता (डीजल) कृष्ण कुमार दास के नेतृत्व में पूरा किया गया। इस इकाई को वरिष्ठ तकनीशियन विश्वरूप सेनगुप्ता द्वारा विकसित किया गया, जिसमें तकनीकी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इस Indigenous Compressor Unit की खासियत यह है कि यह 10 किलोग्राम/सेमी² और 3.5 किलोग्राम/सेमी² तक का दबाव उत्पन्न कर सकती है। इसका उपयोग विभिन्न परीक्षण यंत्रों, उपकरणों की सफाई और अन्य तकनीकी कार्यों में किया जाएगा। साथ ही, इसमें प्रेशर स्विच, सेफ्टी वाल्व और ऑटोमैटिक कॉन्टैक्टर जैसी आधुनिक सुरक्षा सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं।

यह परियोजना Indian Railways Innovation का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें परित्यक्त सामग्री को उपयोग में लाकर लागत में उल्लेखनीय कमी लाई गई है। साथ ही, इन-हाउस विकसित विभिन्न उपकरणों और व्यवस्थाओं से कार्यक्षमता में भी वृद्धि हुई है।

गौरतलब है कि यह पहल Atmanirbhar Bharat और Waste to Wealth की अवधारणा को साकार करती है। इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और स्वदेशी तकनीकी क्षमता को मजबूती मिल रही है, जो भविष्य के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल साबित हो सकती है।

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