अप्रैल में भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी, 10 दिन में 48,213 करोड़ रुपये निकाले

घरेलू शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली का सिलसिला अप्रैल में भी जारी है। 10 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 48,213 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है।

National Securities Depository Limited (एनएसडीएल) के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल के शुरुआती दो कारोबारी दिनों में ही एफपीआई ने 19,837 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। इसके बाद अगले पांच कारोबारी दिनों में 28,376 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर उन्होंने अपना निवेश और कम कर लिया।

इससे पहले मार्च 2026 में भी विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड स्तर पर बिकवाली की थी। मार्च में एफपीआई ने करीब 1.17 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जो एक महीने में अब तक की सबसे बड़ी बिक्री मानी जा रही है। इससे पहले अक्टूबर 2024 में 94,017 करोड़ रुपये की बिकवाली का रिकॉर्ड था, जिसे अब पीछे छोड़ दिया गया है।

साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से कुल मिलाकर 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी कर चुके हैं। हालांकि फरवरी 2026 में उन्होंने 22,615 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ राहत दी थी, जो पिछले 17 महीनों की सबसे बड़ी खरीदारी थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तनाव—खासतौर पर Middle East में बढ़ते संघर्ष—और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है। इसके अलावा रुपये की कमजोरी भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली को बढ़ावा दे रही है।

कैपेक्स गोल्ड एंड इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ Rajeev Dutta का कहना है कि फिलहाल एफपीआई के रुख में बदलाव की संभावना कम है। उनका मानना है कि जब तक वैश्विक हालात सुधरते नहीं हैं और बाजार में स्थिरता नहीं आती, तब तक विदेशी निवेशक सतर्क बने रहेंगे।

विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव कम होना, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, रुपये की मजबूती और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे जैसे कारक भविष्य में विदेशी निवेशकों की वापसी का रास्ता खोल सकते हैं।

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