उपराष्ट्रपति ने ‘टाइड्स ऑफ टाइम’ पुस्तक का किया विमोचन, भारत को बताया लोकतंत्र की जननी

उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने संविधान सदन में राज्यसभा सांसद Sudha Murty द्वारा लिखित पुस्तक Tides of Time का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने संसद में बने भित्ति चित्रों को भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत का जीवंत प्रतिबिंब बताया और भारत को “लोकतंत्र की जननी” कहा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि संविधान सदन में स्थापित भित्ति चित्र केवल कला नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों की सभ्यतागत यात्रा को दर्शाने वाली दृश्य कथाएं हैं। उन्होंने सुधा मूर्ति की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इन चित्रों की कालातीत सुंदरता और गहरे प्रतीकवाद को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
अपने संबोधन में उन्होंने भारत की प्राचीन लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वैशाली से लेकर दक्षिण भारत की कुदावोलै प्रणाली तक संवाद, सहमति और विविध विचारों के सम्मान की परंपरा रही है।
उपराष्ट्रपति ने तमिल कवि Subramania Bharati का उल्लेख करते हुए भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और ज्ञान परंपरा की प्रशंसा की।
उन्होंने संसद भवन में पारंपरिक प्रतीकों के समावेश की भी सराहना की और चोल वंश के पवित्र Sengol को आधुनिक भारत और उसकी सभ्यतागत जड़ों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
पुस्तक की विशेषताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें 124 भित्ति चित्रों के माध्यम से भारत के इतिहास को दर्शाया गया है। इसमें सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर Mahatma Gandhi और Subhas Chandra Bose जैसे महान नेताओं के योगदान को भी शामिल किया गया है।
इस अवसर पर Om Birla, J. P. Nadda सहित कई वरिष्ठ नेता और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
उपराष्ट्रपति ने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए “विकास भी, विरासत भी” के सिद्धांत को दोहराया और नागरिकों से राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ देश सेवा करने का आह्वान किया।





