राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में ‘ग्रंथ कुटीर’ का किया उद्घाटन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कल राष्ट्रपति भवन परिसर में स्थित ‘ग्रंथ कुटीर’ का उद्घाटन किया। यह कुटीर भारत की समृद्ध बौद्धिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ग्रंथ कुटीर में देश की 11 भारतीय शास्त्रीय भाषाओं में रचित लगभग 50 दुर्लभ पांडुलिपियां और 2,300 से अधिक पुस्तकें संग्रहीत की गई हैं।
इस संग्रह में महाकाव्य, दर्शन, भाषा विज्ञान, इतिहास, शासन व्यवस्था, विज्ञान, योग, आयुर्वेद और धार्मिक साहित्य जैसे विविध विषयों की रचनाएं शामिल हैं। विशेष बात यह है कि इन शास्त्रीय भाषाओं में भारत का संविधान भी इस संग्रह का हिस्सा है, जो भारतीय लोकतंत्र और सांस्कृतिक परंपरा के गहरे संबंध को दर्शाता है।
ग्रंथ कुटीर के विकास का प्रमुख उद्देश्य नागरिकों में भारत की शास्त्रीय भाषाओं और साहित्यिक परंपरा के प्रति जागरूकता बढ़ाना, साथ ही ‘विविधता में एकता’ की भावना को सशक्त करना है। यह कुटीर भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक पीढ़ी से जोड़ने का कार्य करेगा।
इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि ग्रंथ कुटीर भारत की शास्त्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए राष्ट्रपति भवन द्वारा किए जा रहे सामूहिक प्रयासों का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इन शास्त्रीय भाषाओं ने आधुनिक भारतीय भाषाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और भारतीय ज्ञान परंपरा की मजबूत नींव रखी है।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि शास्त्रीय भाषाओं में निहित विज्ञान, योग, आयुर्वेद और साहित्य का ज्ञान सदियों से न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व का मार्गदर्शन करता आया है। उन्होंने विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन को बढ़ावा देने तथा युवाओं को कम से कम एक शास्त्रीय भाषा सीखने के लिए प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया।
ग्रंथ कुटीर, भारत की विशाल हस्तलिखित विरासत के संरक्षण, डिजिटलीकरण और प्रसार के लिए शुरू की गई राष्ट्रीय पहल ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के उद्देश्यों को साकार करने का प्रयास है। इस परियोजना को केंद्र और राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, सांस्कृतिक संगठनों और देशभर के व्यक्तिगत दानदाताओं के सहयोग से विकसित किया गया है।






