प्रधानमंत्री मोदी ने शौर्य और मानवता का संदेश दिया, संस्कृत श्लोक साझा कर दिया प्रेरणादायी संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शौर्य और मानवता के मूल्यों को रेखांकित करते हुए एक प्रेरणादायी संस्कृत श्लोक साझा किया और देशवासियों को करुणा, सेवा और संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सच्चा पराक्रम दूसरों के प्राणों की रक्षा में निहित होता है, न कि उन्हें हर लेने में।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा —
“एतदेव परं शौर्यं यत् परप्राणरक्षणम्।
नहि प्राणहरः शूरः शूरः प्राणप्रदोऽर्थिनाम्॥”

इस श्लोक के माध्यम से प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि जो दूसरों के जीवन की रक्षा करता है वही वास्तविक शूरवीर होता है, जबकि प्राण हरने वाला कभी वीर नहीं कहलाता।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विचारधारा भारतीय संस्कृति और परंपरा की आत्मा है, जहां वीरता का अर्थ विनाश नहीं बल्कि संरक्षण, सेवा और मानवता होता है। उन्होंने कहा कि भारत सदैव करुणा, सह-अस्तित्व, सेवा और मानव कल्याण के मार्ग पर चला है और यही उसकी सच्ची पहचान है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश समाज को यह याद दिलाता है कि शक्ति का वास्तविक स्वरूप रक्षा में है, विनाश में नहीं। यह विचार आज के समय में मानवता, शांति और वैश्विक भाईचारे के मूल्यों को और अधिक मजबूत करता है।

Share

Similar Posts