पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. बाबुराम भट्टराई ने प्रतिनिधि सभा निर्वाचन से उम्मीदवारी वापस ली

प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी के संरक्षक तथा नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. बाबुराम भट्टराई ने गोरखा निर्वाचन क्षेत्र संख्या-2 से आगामी प्रतिनिधि सभा निर्वाचन के लिए दी गई अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है। आगामी 5 मार्च को होने वाले चुनाव के लिए मनोनयन दायर करने के कुछ ही समय बाद उन्होंने यह निर्णय लिया।
डॉ. भट्टराई ने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों, शुभचिंतकों और मित्रों से उन्हें चुनाव न लड़ने का सुझाव मिला था। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी एक दल के सांसद बनने से उनकी भूमिका सीमित हो जाती, जबकि वर्तमान तरल राजनीतिक परिस्थिति में सभी के साझा अभिभावक की भूमिका निभाना अधिक उपयुक्त होगा। इसी विचार को स्वीकार करते हुए उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ली है।
उन्होंने कहा कि अब वे संसद से बाहर रहकर ही राजनीतिक दलों को परामर्श, सुझाव और मार्गदर्शन देते रहेंगे। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भट्टराई ने चुनाव न लड़ने और किसी कार्यकारी भूमिका में न रहने की घोषणा की थी, लेकिन देश में बढ़ती राजनीतिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक चुनौतियों और संविधान की त्रुटियों को सुधारने की आवश्यकता को देखते हुए उन्होंने मनोनयन दायर किया था।
डॉ. भट्टराई ने सितंबर में हुए ‘जेन-जी विद्रोह’ को सुशासन और समृद्धि से जुड़े मुद्दों की पुष्टि करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि 70 वर्ष की आयु पूरी कर लेने के बाद अब नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपना चाहिए और स्वयं को अभिभावकीय भूमिका तक सीमित रखना चाहिए।
पूर्व प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा), उज्यालो नेपाल पार्टी सहित नए राजनीतिक दलों और पुराने दलों के भीतर अग्रगामी सोच रखने वाले नेताओं को निस्वार्थ सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही उन्होंने शांति प्रक्रिया के शेष कार्यों, सत्य निरूपण एवं मेलमिलाप तथा बेपत्ता आयोग से जुड़े मामलों को निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए संसद से बाहर रहकर भी दबाव और सहयोग जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।
उम्मीदवारी वापस लेते हुए डॉ. बाबुराम भट्टराई ने उन्हें समर्थन और सुझाव देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।





