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बजट सत्र में पेश हो सकता है लागत-अनुरूप प्रावधानों वाला विद्युत संशोधन विधेयक: मनोहर लाल

केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने संकेत दिए हैं कि विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 को आगामी बजट सत्र में संसद में पेश किया जा सकता है। इस विधेयक में लागत-अनुरूप शुल्क (Cost Reflective Tariff) से जुड़े अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनका उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के घाटे को कम करना और बिजली क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

नई दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय बिजली वितरण कंपनियों के संघ (AIDA) के पहले वार्षिक सम्मेलन ‘EDICON 2026’ को संबोधित करते हुए मनोहर लाल ने कहा कि बिजली आपूर्ति की पूरी मूल्य श्रृंखला—उत्पादन, पारेषण और वितरण—में डिस्कॉम एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। बढ़ती अर्थव्यवस्था को मजबूत पावर सेक्टर की जरूरत है और इसके लिए डिस्कॉम का वित्तीय रूप से सक्षम होना बेहद जरूरी है।

लागत-अनुरूप शुल्क से घटेगा डिस्कॉम का घाटा

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक में बिजली आपूर्ति से जुड़ी सभी लागतों को शुल्क में शामिल करने का प्रावधान किया जा रहा है। इससे डिस्कॉम के लंबे समय से चले आ रहे घाटे को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को बजट सत्र में लाने की तैयारी है और इसके पारित होने के लिए सर्वसम्मति बनाने का प्रयास किया जाएगा।

मनोहर लाल ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 के मसौदे में भी डिस्कॉम के घाटे और कर्ज को कम करने के लिए लागत-अनुरूप शुल्क की व्यवस्था शामिल की गई है। इस पर सभी हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं।

उपभोक्ता सेवा में डिस्कॉम की अहम भूमिका

विद्युत मंत्री ने कहा कि डिस्कॉम सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को B2C (Business to Consumer) सेवाएं देती हैं और बिजली से जुड़ी शिकायतें सबसे पहले इन्हीं के पास आती हैं। इसलिए इन कंपनियों का मजबूत होना पूरे पावर सेक्टर के लिए आवश्यक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि लागत-अनुरूप शुल्क से होने वाली आय का उपयोग क्रॉस-सब्सिडी के लिए किया जा सकता है, लेकिन यह नियमों के दायरे में ही होनी चाहिए।

मजबूत और टिकाऊ पावर सेक्टर का लक्ष्य

मनोहर लाल ने एआईडीए की अवॉर्ड पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार एक मजबूत, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार बिजली वितरण इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक लागू होता है, तो घाटे में चल रही डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति में बड़ा सुधार आ सकता है और पावर सेक्टर में प्रतिस्पर्धा व दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।

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