ईपीएफओ वेतन सीमा संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, केंद्र को 4 महीने में फैसला लेने का आदेश

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPFS) के तहत वेतन सीमा में संशोधन पर चार महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि पिछले 11 वर्षों से ईपीएफओ की वेतन सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

⚖️ जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आदेश

न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने यह निर्देश एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान दिए। याचिका में कहा गया कि वेतन सीमा में लंबे समय से बदलाव न होने के कारण श्रमिकों का एक बड़ा वर्ग ईपीएफओ के दायरे से बाहर रह गया है।

👷‍♂️ सामाजिक सुरक्षा से वंचित हो रहे कर्मचारी

ईपीएफएस एक सामाजिक कल्याण योजना है, जिसका उद्देश्य संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि मौजूदा ₹15,000 प्रतिमाह की वेतन सीमा आज के समय में अप्रासंगिक और तर्कहीन हो चुकी है।

📉 मुद्रास्फीति और आय वृद्धि से कोई तालमेल नहीं

संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अधिवक्ता प्रणव सचदेवा और नेहा राठी द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि मौजूदा वेतन सीमा का

  • मुद्रास्फीति

  • न्यूनतम मजदूरी

  • प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि

से कोई सीधा संबंध नहीं है, जबकि विशेषज्ञ निकायों और संसदीय समितियों ने बार-बार इसमें संशोधन की सिफारिश की है।

🔍 कर्मचारियों को मिल सकती है राहत

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश को कर्मचारियों के हित में अहम कदम माना जा रहा है। यदि वेतन सीमा में बढ़ोतरी होती है, तो इससे लाखों अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत आ सकेंगे।

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